आशु वर्मा / संवाददाता
तिल्दा-नेवरा में गरीब और बेसहारा लोगों के लिए बनाई गई दीनदयाल अंत्योदय आश्रय योजना अब विवादों के घेरे में आ गई है। शासन द्वारा दीनदयाल उपाध्याय चौक में निर्मित आश्रय प्रतिक्षालय का उद्देश्य जरूरतमंद राहगीरों को रात्रि विश्राम एवं सुरक्षित ठहराव की सुविधा देना था, लेकिन अब इस जनहितकारी योजना पर मुनाफाखोरी के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
जानकारी के अनुसार नगर पालिका द्वारा उक्त प्रतिक्षालय को कथित रूप से एक सब्जी व्यवसायी को लगभग 21 हजार रुपये मासिक किराये पर सौंप दिया गया है। आरोप है कि पूरे आश्रय गृह की चाबी निजी व्यक्ति को देकर शासन की मूल मंशा के विपरीत कार्य किया गया। मामला सामने आने के बाद नगरवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है और लोग इसे गरीबों के अधिकारों पर सीधा हमला बता रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिस भवन में बेसहारा लोगों को रात बितानी थी, वह अब निजी कब्जे और व्यावसायिक उपयोग की भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है। लोगों ने नगर पालिका प्रशासन पर नियमों को दरकिनार कर मनमानी करने का आरोप लगाया है। साथ ही नगर में भूमाफियाओं की सक्रियता और उनसे कथित सांठगांठ को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
जनता के बीच यह चर्चा भी तेज है कि नगर पालिका अध्यक्ष के पति के प्रभाव में प्रशासनिक फैसले लिए जा रहे हैं, जिसके चलते भ्रष्टाचार को खुला संरक्षण मिल रहा है। नगरवासियों का आरोप है कि कई गंभीर शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना बड़े राजनीतिक संरक्षण की ओर संकेत करता है।
अब देखना यह होगा कि शासन गरीबों के आश्रय पर लगे इस कथित “कब्जे” को हटाकर व्यवस्था सुधारता है या फिर जनहित की यह योजना राजनीतिक और व्यावसायिक हितों की भेंट चढ़ती रहेगी।
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