दतिया में झूठे दुष्कर्म केस में महिला को 10 साल की सजा

दतिया, 21 अप्रैल 2026। मध्यप्रदेश के दतिया जिले से न्याय व्यवस्था को लेकर एक सख्त और अहम फैसला सामने आया है। दुष्कर्म और एससी-एसटी एक्ट के तहत झूठा मामला दर्ज कराने वाली एक महिला को न्यायालय ने 10 वर्ष के कठोर कारावास और 10,500 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला 16 अप्रैल 2026 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश श्री राजेश भंडारी द्वारा सुनाया गया।
जानकारी के अनुसार, वैभवी सनोरिया नामक महिला ने वर्ष 2021 में थाना बड़ौनी में शिकायत दर्ज कराते हुए अपने पड़ोसी कालीचरण पर दुष्कर्म और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच पूरी करते हुए न्यायालय में आरोपपत्र पेश किया।
हालांकि, सुनवाई के दौरान मामला पलट गया। फरियादिया ने अदालत में स्वीकार किया कि उसने रुपए के लेनदेन विवाद के चलते झूठा मामला दर्ज कराया था। इसके बाद न्यायालय ने आरोपी कालीचरण को बरी कर दिया।
अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए महिला के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए। इसके बाद दर्ज नए प्रकरण में उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 182, 195 और 211 के तहत दोषी पाया गया।
न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि झूठे मामलों की बढ़ती प्रवृत्ति न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है और इससे समाज में गलत संदेश जाता है।
प्रकरण में शासन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक अरुण कुमार लिटोरिया ने पैरवी की। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने दोष सिद्ध करते हुए सजा सुनाई।
👉 यह फैसला झूठे आरोप लगाने वालों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है कि न्याय प्रणाली के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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