रायपुर। छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 को राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद इसका राजपत्र में प्रकाशन हो चुका है। इसके साथ ही यह विधेयक अब प्रदेश में कानून के रूप में प्रभावी हो गया है। इससे पहले राज्य में वर्ष 1968 का धर्मांतरण कानून लागू था, जिसे अब नए सख्त प्रावधानों के साथ प्रतिस्थापित किया गया है।
नए कानून के तहत अवैध धर्मांतरण के मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। इसमें अधिकतम 20 वर्ष तक की कैद और 30 लाख रुपए तक का जुर्माना शामिल है। वहीं, यदि कोई व्यक्ति दोबारा जबरन धर्मांतरण कराता है, तो उसके लिए आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान रखा गया है।
यह विधेयक कुल छह अध्याय और 31 धाराओं में विभाजित है, जिसमें वैध और अवैध धर्मांतरण की स्पष्ट परिभाषा दी गई है। धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को पारदर्शी और नियंत्रित बनाने के लिए नए नियम लागू किए गए हैं। अब इच्छुक व्यक्ति को धर्म परिवर्तन से पहले अधिकृत अधिकारी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करना होगा। इसके बाद निर्धारित समयसीमा में सूचना सार्वजनिक की जाएगी और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। जांच पूरी होने के बाद ही धर्म परिवर्तन का प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि हर व्यक्ति को अपनी इच्छा से धर्म चुनने की स्वतंत्रता है, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाएगा कि धर्म परिवर्तन किसी दबाव, प्रलोभन या भय के कारण न हो। ऐसे मामलों की जांच अनिवार्य रूप से की जाएगी।
धर्मांतरण पूर्व पंजीयन अनिवार्य
नए कानून के अनुसार धर्मांतरण कराने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के लिए पंजीयन अनिवार्य कर दिया गया है। उन्हें प्रत्येक वर्ष अधिकृत अधिकारी को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इसमें धर्मांतरण से जुड़े सभी मामलों का विवरण देना होगा। साथ ही ग्रामसभा की भागीदारी सुनिश्चित कर स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने का प्रयास किया गया है।
इसे माना जाएगा धर्मांतरण
अपनी आस्था या धर्म छोड़कर दूसरे धर्म को अपनाना।
जन्म, विवाह और मृत्यु को छोड़ अन्य धर्म के रीति-रिवाज अपनाना।
पैतृक देवताओं की पूजा बंद कर नई धार्मिक आस्था स्वीकारना।
किसी अन्य मूल के धर्म को अपनाना।
पारंपरिक मान्यताओं का त्याग कर नए धर्म का पालन करना।
स्पष्टीकरण: यदि कोई व्यक्ति अपने मूल या पैतृक धर्म में वापस लौटता है, तो उसे धर्मांतरण नहीं माना जाएगा।
दंड का प्रावधान
सामान्य अवैध धर्मांतरण: 7 से 10 वर्ष की सजा, ₹5 लाख तक जुर्माना।
सामूहिक धर्मांतरण: 10 वर्ष से आजीवन कारावास, ₹25 लाख तक जुर्माना।
विशेष वर्ग (महिला, नाबालिग, अनुसूचित जाति/जनजाति): 10 से 20 वर्ष की सजा, ₹10 लाख जुर्माना।
विदेशी फंडिंग के जरिए धर्मांतरण: 10 से 20 वर्ष की सजा, ₹20 लाख जुर्माना।
भय, प्रलोभन या तस्करी से धर्मांतरण: 10 से 20 वर्ष की सजा, ₹30 लाख तक जुर्माना।
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