खैरागढ़ में गूंज रही भक्ति की सरिता: “राग नहीं, अनुराग से मिलते हैं भगवान” — आचार्य नरेन्द्र नयन शास्त्री
खैरागढ़। जिले के ग्राम देवरी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा इन दिनों श्रद्धा और भक्ति का केंद्र बनी हुई है। यहां सैकड़ों श्रद्धालु, सेवक और सनातन धर्मावलंबी कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। कथा वाचन के दौरान आचार्य नरेन्द्र नयन शास्त्री (चाय वाले बाबा) ने भक्ति के गूढ़ रहस्यों को सरल शब्दों में समझाते हुए कहा कि “भगवान तक पहुंचने के लिए राग नहीं, बल्कि अनुराग आवश्यक है।”
मीराबाई के प्रसंग से दिया गहरा संदेश
आचार्य जी ने संत मीराबाई के जीवन का एक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि एक बार देर रात तक भजन-कीर्तन के बाद मीरा समाधि में लीन हो गईं। साधु-संतों ने जाते समय दीवार पर लिख दिया कि “राग में भजन गाया करो।” मीरा ने उस “राग” के आगे “अनु” जोड़कर उसे “अनुराग” बना दिया और उसी भाव के साथ आगे बढ़ती रहीं।
इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने समझाया कि संगीत, सुर-ताल और वाद्य यंत्रों से अधिक महत्व हृदय में बसे प्रेम और समर्पण का है।
भक्ति में प्रेम और त्याग का महत्व
उन्होंने कहा कि भक्ति काल के संत — मीराबाई, सूरदास, कबीर, संत ज्ञानेश्वर, तुलसीदास, रैदास और रसखान — सभी ने अनुराग के माध्यम से ही भगवान को पाया। उस समय भजन केवल प्रभु को समर्पित होता था, जिसमें न दिखावा था और न ही कोई स्वार्थ।
आज के समय में भक्ति में भव्य पंडाल, माइक, सोशल मीडिया जैसे माध्यम तो बढ़ गए हैं, लेकिन हृदय में सच्चा अनुराग कम होता जा रहा है।
“हर कर्म को प्रभु का कार्य मानें”
आचार्य नरेन्द्र नयन शास्त्री ने कहा कि यदि व्यक्ति अपने हर कर्म को भगवान का कार्य मानकर करेगा, तो उसके भीतर स्वतः प्रेम और त्याग का भाव जागृत होगा। यही भाव आगे चलकर अनुराग बनता है और उसी से प्रभु कृपा प्राप्त होती है। उन्होंने शबरी प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां सच्चा अनुराग होता है, वहां भगवान स्वयं भक्त के पास आते हैं।
चाय वाले बाबा की विशेष पहचान
ज्ञात हो कि आचार्य नरेन्द्र नयन शास्त्री “चाय वाले बाबा” के नाम से प्रसिद्ध हैं। वे केवल एक मुट्ठी चावल देखकर अपने ज्ञान के आधार पर सटीक गणना करने के लिए जाने जाते हैं। प्रतिदिन सुबह 9 से 12 बजे तक उनका दरबार लगता है, जहां बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याओं के समाधान की आशा लेकर पहुंचते हैं।
दान-पुण्य में भी अग्रणी
आचार्य जी द्वारा कथा से प्राप्त समस्त चढ़ावा गरीब बेटियों के कल्याण के लिए दान कर दिया जाता है। यही कारण है कि उनके प्रति श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास लगातार बढ़ रहा है।
ग्राम देवरी में चल रही इस भागवत कथा में न केवल स्थानीय ग्रामीण, बल्कि दूर-दराज से भी श्रद्धालु पहुंचकर धर्म लाभ ले रहे हैं।
✍️ एन भारत न्यूज के लिए विशेष रिपोर्ट
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