महासमुंद। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी विनय कुमार लंगेह के निर्देश पर गठित संयुक्त जांच दल ने जिले के तुमगांव और बिरकोनी स्थित औद्योगिक प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान श्रमिकों की सुरक्षा, वेतन भुगतान, वाहन संचालन और श्रम कानूनों के पालन से जुड़ी कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिन पर संबंधित प्रबंधन को नोटिस जारी कर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
संयुक्त जांच दल में सहायक संचालक औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा दिशा शुक्ला, परिवहन अधिकारी प्रतीक शुक्ला, श्रम पदाधिकारी डी.एन. पात्र, पर्यावरण विभाग के एस.के. चौधरी, सहायक संचालक उद्योग विभाग वैभवी साहू तथा श्रम उप निरीक्षक बेलारसन बघेल शामिल रहे।
सबसे पहले टीम ने तुमगांव स्थित वामा डेयरी का निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि श्रमिकों को समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा था और उन्हें आवश्यक व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) भी उपलब्ध नहीं कराए गए थे। परिवहन विभाग की जांच में दो वाहन बिना फिटनेस प्रमाणपत्र के संचालित पाए गए, जिन पर कार्रवाई करते हुए 8,800 रुपये का समन शुल्क वसूला गया। पर्यावरण एवं उद्योग विभाग की जांच में कोई अनियमितता नहीं मिली।
श्रम विभाग द्वारा किए गए निरीक्षण में न्यूनतम वेतन अधिनियम, वेतन भुगतान अधिनियम, समान पारिश्रमिक अधिनियम तथा छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण निधि अधिनियम के तहत आवश्यक सूचना बोर्ड और अधिनियमों का सारांश प्रदर्शित नहीं पाया गया। साथ ही प्रबंधन आवश्यक अभिलेख भी प्रस्तुत नहीं कर सका। इन कमियों के संबंध में नोटिस जारी किया जा रहा है।
इसके बाद संयुक्त दल ने बिरकोनी स्थित शुभम ऑर्गेनिक का निरीक्षण किया, जहां वैध कारखाना लाइसेंस नहीं पाया गया। निरीक्षण के समय इकाई बंद मिली।
टीम ने जेनिथ एग्रीजोन, बिरकोनी का भी निरीक्षण किया। यहां श्रमिकों को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाने, पर्याप्त अग्निशमन यंत्र नहीं होने तथा कार्य अवधि संबंधी सूचना प्रदर्शित नहीं होने जैसी कमियां सामने आईं। परिवहन विभाग की जांच में एक वाहन का फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं मिला, जबकि चार वाहनों में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) नहीं लगी पाई गई। इस संबंध में भी नोटिस जारी किया जा रहा है।
श्रम विभाग की जांच में सूचना बोर्ड प्रदर्शित नहीं होना, श्रमिकों से ओवरटाइम कार्य कराना, आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत नहीं करना तथा शासन द्वारा निर्धारित दर से कम वेतन भुगतान किए जाने जैसी अनियमितताएं पाई गईं।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि श्रमिकों के अधिकारों, औद्योगिक सुरक्षा मानकों और वैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए संबंधित प्रबंधनों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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