रायगढ़ में आबकारी विभाग और प्लेसमेंट कंपनियों पर गंभीर सवाल, ईओडब्ल्यू जांच में बड़े खुलासे
रायगढ़। छत्तीसगढ़ के आबकारी विभाग में कर्मचारियों के ओवरटाइम, बोनस और हॉलीडे-पे की राशि में करोड़ों रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में रायगढ़ जिले के करीब 150 कर्मचारियों के लगभग 7 करोड़ रुपये के गबन की आशंका जताई गई है। यह राशि कर्मचारियों को मिलने के बजाय कथित रूप से प्लेसमेंट कंपनियों और अधिकारियों की मिलीभगत से हड़प ली गई।
जानकारी के अनुसार, पिछली सरकार के कार्यकाल में राज्य की 741 शराब दुकानों के संचालन के लिए पांच निजी प्लेसमेंट कंपनियों को ठेका दिया गया था। इनमें ए टू जेड इंफ्रा सर्विसेज, प्राइम वन वर्कफोर्स प्राइवेट लिमिटेड, सुमित फैसिलिटीज, अलर्ट कमांडोज और ईगल हंटर सॉल्यूशन शामिल थीं। रायगढ़ जिले में अधिकांश कर्मचारियों की नियुक्ति प्राइम वन वर्कफोर्स और ईगल हंटर के माध्यम से की गई थी।
सरकार ने जारी किए करोड़ों, कर्मचारियों तक नहीं पहुंची रकम
ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया है कि जिला आबकारी अधिकारियों द्वारा ओवरटाइम के बिल तैयार कर शासन को भेजे गए थे। शासन ने तीन वर्षों में पूरे प्रदेश के लिए लगभग 115 करोड़ रुपये ओवरटाइम मद में जारी किए, लेकिन कर्मचारियों को भुगतान नहीं किया गया। आरोप है कि राशि कंपनियों से वापस लेकर उसे विभिन्न स्तरों पर बांट दिया गया।
रायगढ़ जिले में ही करीब 7 करोड़ रुपये के ओवरटाइम भुगतान में गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।
हॉलीडे-पे और बोनस भी डकार गए
जांच में यह भी सामने आया है कि रविवार और अन्य अवकाश के दिनों में कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिए हॉलीडे-पे के बिल बनाकर शासन से राशि ली गई। अक्टूबर 2019 से दिसंबर 2023 तक इस मद में लगभग 50 करोड़ रुपये जारी किए गए, लेकिन कर्मचारियों को भुगतान नहीं मिला। रायगढ़ जिले का हिस्सा लगभग 1 से 2 करोड़ रुपये बताया जा रहा है।
इतना ही नहीं, कर्मचारियों के बोनस की राशि भी कथित रूप से हड़प ली गई।
कर्मचारियों का दर्द: "काम कराया, पैसा नहीं दिया"
एक पीड़ित कर्मचारी ने बताया कि वह आबकारी विभाग में सेल्समैन के रूप में कार्यरत है और उसे प्रतिमाह 12 हजार रुपये वेतन मिलता है। नियमानुसार उसे लगभग 4753 रुपये प्रतिमाह ओवरटाइम मिलना था, जो कभी नहीं मिला। इसी प्रकार सुपरवाइजर को 6995 रुपये और मल्टी वर्कर को 3930 रुपये प्रतिमाह ओवरटाइम का भुगतान होना था, लेकिन किसी को भी यह राशि प्राप्त नहीं हुई।
प्लेसमेंट कंपनियों की भूमिका पर सवाल
सूत्रों के अनुसार शराब दुकानों के संचालन के लिए जिन निजी कंपनियों का चयन किया गया था, उनके पीछे प्रभावशाली लोगों की भूमिका होने की चर्चा रही है। युवाओं की भर्ती प्रक्रिया में भी अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।
अब सबकी नजर ईओडब्ल्यू जांच पर
करोड़ों रुपये के इस कथित घोटाले ने आबकारी विभाग, प्लेसमेंट कंपनियों और तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। कर्मचारी अब उम्मीद कर रहे हैं कि जांच एजेंसियां दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगी और वर्षों से बकाया उनका हक उन्हें वापस मिलेगा।
— N भारत न्यूज
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