राजीव सभलोक पर श्रमिकों के गंभीर आरोप: गाली-गलौज, ट्रक से कुचलने की धमकी और 150 श्रमिकों के साथ कथित अन्याय का मामला

150 श्रमिकों के साथ अन्याय का आरोप: 12 घंटे काम, वेतन बकाया और बिना सूचना नौकरी से निकाले जाने पर फूटा गुस्सा
सिलतरा की एसकेएस इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ श्रमिकों ने उठाई आवाज, निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग

सिलतरा स्थित SKS Ispat Pvt. Ltd. के लगभग 150 श्रमिकों ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप और न्याय की मांग की है। श्रमिकों का कहना है कि वर्षों से मेहनत करने के बावजूद उन्हें उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है और उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
श्रमिकों के अनुसार, कंपनी में निर्धारित 8 घंटे की ड्यूटी के बजाय उनसे लगातार 12 घंटे तक काम कराया गया। इसके बावजूद उन्हें उचित भुगतान नहीं मिला और कई कर्मचारी अपने मेहनताना तथा बकाया राशि के लिए भटकने को मजबूर हैं।
बिना सूचना 150 श्रमिकों को काम से हटाने का आरोप

प्रभावित कर्मचारियों का आरोप है कि कंपनी ने लगभग 150 श्रमिकों को बिना किसी पूर्व सूचना, नोटिस या वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए कार्य से हटा दिया। इस फैसले से सैकड़ों परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई है और उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

कंपनी अधिकारी पर दुर्व्यवहार और हाथापाई का आरोप

श्रमिकों का आरोप है कि कंपनी के अधिकारी राजीव सभलोक, जो स्वयं को डायरेक्टर बताते हैं, ने कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया तथा कथित रूप से हाथापाई भी की। श्रमिकों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से कार्यस्थल का माहौल खराब हुआ है और कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है।

लगभग 30 लाख रुपये के बकाया और वित्तीय अनियमितता की जांच की मांग

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, लगभग 30 लाख रुपये से संबंधित बकाया भुगतान अथवा वित्तीय अनियमितता का मामला भी सामने आया है। श्रमिकों ने आरोप लगाया है कि उनकी मेहनत की कमाई का भुगतान समय पर नहीं किया गया और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

श्रमिकों का आरोप – कंपनी ने जवाब देने से किया इनकार

प्रभावित श्रमिकों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्याओं और शिकायतों को लेकर कई बार कंपनी प्रबंधन से संवाद करने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। श्रमिकों के अनुसार, कंपनी ने आरोपों पर अपना पक्ष रखने से भी इनकार कर दिया।

प्रशासन से न्याय की मांग

सभी प्रभावित श्रमिकों ने श्रम विभाग, जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, श्रमिकों का बकाया भुगतान सुनिश्चित किया जाए तथा बिना सूचना हटाए गए कर्मचारियों को न्याय दिलाया जाए।

"हम अपने हक, सम्मान और मेहनत की कमाई के लिए लड़ रहे हैं। प्रशासन हमारी आवाज सुने और हमें न्याय दिलाए।" — प्रभावित श्रमिक

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