हादसे के तुरंत बाद सेना, नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एनडीआरएफ), स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एसडीआरएफ), पुलिस और फायर सर्विस की संयुक्त टीमों ने बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। मलबे के नीचे अभी भी कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है, जिसके चलते रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भवन गिरने के बाद मलबे में दबे लोगों की मदद के लिए पुकारें सुनाई दे रही थीं, जिससे बचाव दलों को जीवित लोगों के मिलने की उम्मीद बनी हुई है। बचावकर्मी भारी मशीनों और विशेष उपकरणों की मदद से मलबा हटाने में जुटे हुए हैं।
घटना की गंभीरता को देखते हुए कोलकाता पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। कोलकाता पुलिस के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) के आदेश पर ताराताला पुलिस थाना में 24 जून 2026 को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 105, 110 और 3(5) के तहत दर्ज प्रकरण को डिटेक्टिव डिपार्टमेंट को सौंप दिया गया है।
एसआईटी का नेतृत्व डिटेक्टिव डिपार्टमेंट के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) करेंगे। जांच दल में डिटेक्टिव डिपार्टमेंट और ताराताला थाने के अधिकारी शामिल रहेंगे। वहीं, डिटेक्टिव डिपार्टमेंट के इंस्पेक्टर हीराक दलापति को मामले का नया जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एसआईटी को हादसे के कारणों की विस्तृत जांच करने और समय-समय पर वरिष्ठ अधिकारियों को प्रगति रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। प्रारंभिक तौर पर निर्माण कार्य में लापरवाही और सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर भी जांच की जा रही है।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और घायलों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना है।
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