बस्तर की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल, 6201 पद रिक्त; सरकार से जवाब मांगते हुए आंदोलन की चेतावनी


जगदलपुर। बस्तर संभाग की शिक्षा व्यवस्था को लेकर बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन के मुख्य संयोजक एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के बस्तर संभाग अध्यक्ष नवनीत चाँद ने आरोप लगाया कि संभाग में हजारों शिक्षकीय पद रिक्त होने, सैकड़ों विद्यालयों के एकल शिक्षक व्यवस्था पर संचालित होने तथा अनेक स्कूलों के जर्जर एवं भवनविहीन होने के बावजूद सरकार प्रभावी कदम नहीं उठा रही है।
नवनीत चाँद ने कहा कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बस्तर संभाग में 6201 शिक्षकीय पद रिक्त हैं, जबकि 360 विद्यालय केवल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा 97 विद्यालय जर्जर अथवा भवनविहीन स्थिति में हैं, जिससे विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।
उन्होंने कहा कि यह स्थिति शिक्षा के अधिकार अधिनियम तथा संविधान के अनुच्छेद 21A, 14 और 46 की मूल भावना के विपरीत है। उन्होंने सवाल किया कि खनिज और वन संपदा से समृद्ध बस्तर क्षेत्र से सरकार को भारी राजस्व प्राप्त होने के बावजूद आदिवासी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा क्यों नहीं मिल पा रही है।

संगठन ने मांग की है कि रिक्त शिक्षकीय पदों पर विशेष भर्ती अभियान चलाया जाए, शिक्षक संलग्नीकरण तत्काल समाप्त किया जाए, जर्जर एवं भवनविहीन विद्यालयों का तकनीकी ऑडिट कराया जाए तथा शिक्षा विभाग की योजनाओं का वित्तीय, तकनीकी और सामाजिक ऑडिट कराया जाए। साथ ही बस्तर विशेष आदिवासी शिक्षा मिशन प्रारंभ करने की भी मांग की गई है।

नवनीत चाँद ने चेतावनी दी कि यदि 30 दिनों के भीतर सरकार द्वारा ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) व्यापक जनजागरण अभियान, जनसुनवाई, धरना-प्रदर्शन और लोकतांत्रिक जनआंदोलन शुरू करेंगे।

उन्होंने कहा, "बस्तर के बच्चों का भविष्य किसी घोषणा का विषय नहीं, बल्कि उनका संवैधानिक अधिकार है।"

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