भाजपा नेता के बेटे के खाते में लाखों के संदिग्ध लेन-देन, FIR के बाद भी कार्रवाई का इंतजार


डेढ़ करोड़ का साइबर फ्रॉड या सत्ता का संरक्षण?

अंबागढ़ चौकी। डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक के कथित साइबर फ्रॉड मामले ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। केंद्र सरकार के साइबर सेल (I4C) की सूचना के आधार पर दर्ज FIR में 14 बैंक खातों को "म्यूल अकाउंट" के रूप में चिन्हित किया गया है। आरोप है कि इन खातों के माध्यम से 1 जनवरी 2024 से 31 दिसंबर 2024 के बीच लगभग 1.69 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ।

सबसे अधिक चर्चा उस खाते को लेकर है जो कथित तौर पर एक भाजपा नेता के पुत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। दस्तावेजों के अनुसार उक्त खाते में लगभग 90 लाख रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन होने की बात सामने आई है।

जनता का सवाल – कानून सबके लिए बराबर है या नहीं?

यदि किसी आम व्यक्ति के खाते में इतने बड़े स्तर का संदिग्ध लेन-देन सामने आता, तो क्या अब तक गिरफ्तारी नहीं हो चुकी होती? क्या राजनीतिक रसूख जांच की रफ्तार को प्रभावित कर रहा है? यही सवाल अब क्षेत्र की जनता पूछ रही है।

FIR दर्ज, लेकिन आगे क्या?

मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66D के तहत अपराध दर्ज किया गया है। आरोपों में संगठित अपराध, धोखाधड़ी, बेईमानी और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर प्रावधान शामिल हैं। इसके बावजूद अब तक किसी बड़ी कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है।

संदिग्ध लेन-देन की झलक

IMPS ट्रांजैक्शन – ₹2.37 लाख

UPI ट्रांजैक्शन – ₹1.50 लाख

ATM निकासी – ₹2 लाख

IMPS ट्रांजैक्शन – ₹3.75 लाख

UPI ट्रांजैक्शन – ₹1.80 लाख


कुल संदिग्ध ट्रांजैक्शन का आंकड़ा लगभग ₹90 लाख से अधिक बताया जा रहा है।

जांच या लीपापोती?

भ्रष्टाचार और अपराध पर "जीरो टॉलरेंस" का दावा करने वाली सरकार और पुलिस प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मामले में निष्पक्ष कार्रवाई होगी या जांच फाइलों तक ही सीमित रह जाएगी?

जनता जवाब चाहती है — FIR के बाद अगला कदम कब? जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब? और क्या कानून का तराजू सत्ता और आम नागरिक के लिए एक समान है?

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