छत्तीसगढ़ की माटी से सैनिकों को भेजा जाएगा 'सिपाही रक्षा-सूत्र', ऑपरेशन रक्षा-सूत्र 2026 का शुभारंभ

रायपुर। छत्तीसगढ़ की माटी का गौरव "ऑपरेशन सिपाही रक्षा-सूत्र 0.4 वर्ष 2026" का शुभारंभ हो गया है। अभियान के संयोजकों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में छत्तीसगढ़ की पवित्र मिट्टी, राखी और बच्चों के संदेशों से युक्त 27 लाख 92 हजार रक्षा-सूत्र भारतीय सैनिकों तक सेना मुख्यालय के माध्यम से निशुल्क पहुंचाए जा चुके हैं।

इस वर्ष अभियान के संरक्षक के रूप में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, डॉ. विनोद तिवारी और महेंद्र जैन सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि जुड़े हैं। अभियान का केंद्रीय प्रतिनिधित्व केंद्रीय मंत्री तोखन साहू करेंगे।

अभियान के तहत स्कूली बच्चे और आमजन एक लिफाफे में अपने आंगन की एक चुटकी मिट्टी, एक राखी और भारतीय सैनिकों के नाम भावनात्मक पत्र लिखकर भेजते हैं। इन रक्षा-सूत्रों को स्कूलों, सामाजिक संगठनों और महिला समूहों के माध्यम से संग्रहित कर पूर्व सैनिक संगठन "सिपाही" और पूर्व सैनिक महासभा द्वारा निशुल्क सेना मुख्यालय तक पहुंचाया जाता है।

अभियान का शुभारंभ 3 अगस्त 2026 को दंतेवाड़ा स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर से होगा। इसके बाद यह यात्रा जगदलपुर, कोंडागांव, कांकेर, राजिम, रायपुर, दुर्ग-भिलाई, राजनांदगांव, खैरागढ़, बेमेतरा, कवर्धा, लोरमी, तखतपुर, अकलतरा, जांजगीर, खरसिया, रायगढ़, सक्ती, चांपा, कोरबा और रतनपुर सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से होकर गुजरेगी।

15 अगस्त को बिलासपुर से भव्य शोभायात्रा के साथ अभियान आगे अंबिकापुर, रांची, वाराणसी, अयोध्या, लखनऊ, आगरा, मथुरा होते हुए 22 अगस्त को नई दिल्ली पहुंचेगा, जहां रक्षा मंत्रालय और भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में रक्षा-सूत्रों का स्वागत प्रस्तावित है।

अभियान के संयोजक एवं पूर्व सैनिक संगठन "सिपाही" के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह राणा ने प्रदेश के सभी स्कूलों, स्काउट-गाइड, महिला समूहों और सामाजिक संगठनों से इस राष्ट्रभक्ति अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है। उनके अनुसार यह अभियान देशवासियों और सीमा पर तैनात सैनिकों के बीच भावनात्मक जुड़ाव का सशक्त माध्यम बन चुका है।

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