दुर्ग के चरोदा में मिला ल्यूसिस्टिक कॉमन करैत, देश का छठा राज्य बनने की संभावना
दुर्ग/चरोदा। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के चरोदा स्थित पंचशील नगर में एक अत्यंत दुर्लभ ल्यूसिस्टिक (Leucistic) कॉमन करैत मिलने से वैज्ञानिकों और वन्यजीव विशेषज्ञों में उत्साह है। 21 जुलाई 2026 की रात एक आवासीय मकान से इस दुर्लभ सांप का सुरक्षित रेस्क्यू वन विभाग की मौजूदगी में वन्यजीव रेस्क्यूअर अविनाश मौर्य और विजय शर्मा ने किया।
रेस्क्यू के दौरान लगभग 2.5 से 3 फीट लंबा यह कॉमन करैत लगभग पूरी तरह सफेद रंग का मिला, जबकि इसकी आंखें सामान्य काले रंग की थीं। इसी वजह से इसे अल्बिनो नहीं बल्कि ल्यूसिस्टिक माना गया। ल्यूसिज्म एक अत्यंत दुर्लभ आनुवंशिक अवस्था है, जिसमें शरीर का रंगद्रव्य कम हो जाता है, लेकिन आंखों का रंग सामान्य रहता है।
प्रारंभिक वैज्ञानिक जानकारी के अनुसार, भारत में इस तरह के ल्यूसिस्टिक कॉमन करैत के बेहद कम प्रामाणिक रिकॉर्ड उपलब्ध हैं। यदि आगामी वैज्ञानिक शोध और साहित्य समीक्षा में इसकी पुष्टि होती है, तो छत्तीसगढ़ इस दुर्लभ खोज का दस्तावेजीकरण करने वाला देश का छठा राज्य बन सकता है।
कॉमन करैत भारत के 'बिग फोर' सबसे विषैले सांपों में शामिल है। इसका विष न्यूरोटॉक्सिक होता है, जो सीधे तंत्रिका तंत्र पर असर डालता है। इसका दंश अक्सर बिना अधिक दर्द के होता है, जिससे कई बार पीड़ित इसकी गंभीरता को समय पर समझ नहीं पाता। समय पर इलाज न मिलने पर श्वसन तंत्र प्रभावित होने से जान भी जा सकती है।
वन्यजीव विशेषज्ञ अविनाश मौर्य ने बताया कि सफेद रंग होने के बावजूद यह सांप सामान्य कॉमन करैत जितना ही विषैला था। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी सफेद या अलग रंग के सांप को देखकर उसे पकड़ने या मारने का प्रयास न करें, बल्कि तुरंत वन विभाग या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना दें।
रेस्क्यू के बाद वन विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार सांप को सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि इस दुर्लभ खोज पर विस्तृत वैज्ञानिक शोध-पत्र तैयार किया जा रहा है। यदि यह राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका में प्रकाशित होता है, तो यह छत्तीसगढ़ की जैव विविधता और भारतीय सर्प विज्ञान (Herpetology) के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।
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