महासमुंद जिले के बसना विकासखंड के ग्राम पंचायत लम्बर के छिर्राबहारा गांव में करीब 700 ग्रामीण आज भी पक्के पुल का इंतजार कर रहे हैं। बारिश में नदी उफान पर आने के बाद ग्रामीणों ने खुद बांस और बल्लियों से अस्थायी पुल तैयार किया है।
बच्चों को स्कूल, मरीजों को अस्पताल और ग्रामीणों को बाजार जाने के लिए जान जोखिम में डालकर इसी जुगाड़ के पुल से नदी पार करनी पड़ती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पक्के पुल के निर्माण के लिए 3 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत है, तो आखिर पुल अब तक जमीन पर क्यों नहीं उतरा?
ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार की सुस्ती और जिम्मेदार विभाग की अनदेखी के कारण उन्हें हर दिन परेशानी उठानी पड़ रही है।
सवाल सीधा है—स्वीकृति के बावजूद पुल कब बनेगा और ग्रामीणों को इस जानलेवा जुगाड़ से कब मुक्ति मिलेगी?
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