दुर्ग-भिलाई। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई में ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश के नाम पर एक रिटायर्ड बीएसपी कर्मचारी से 45 लाख 18 हजार 998 रुपए की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। आरोपियों ने लोगों का भरोसा जीतने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और समाजसेवी सुधा मूर्ति जैसे चर्चित नामों का इस्तेमाल करते हुए निवेश से जुड़े विज्ञापन दिखाए थे।
मामले में भिलाई नगर पुलिस ने मध्यप्रदेश के बैतूल से 24 वर्षीय विशाल नागले को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी 9वीं तक पढ़ा है और मजदूरी करता है। पुलिस अब इस ठगी के मास्टरमाइंड और पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।
विज्ञापन देखकर किया था निवेश
पुलिस के मुताबिक पीड़ित ने सोशल मीडिया पर निवेश से संबंधित विज्ञापन देखा। विज्ञापन में बड़े लोगों के नाम का इस्तेमाल किया गया था। इसे भरोसेमंद निवेश योजना समझकर पीड़ित ने विज्ञापन में दिए लिंक पर क्लिक कर रजिस्ट्रेशन किया।
इसके बाद उसकी बातचीत कृतिका नाम की महिला से हुई। उसने खुद को निवेश प्रक्रिया से जुड़ा बताया और वरिष्ठ नागरिक होने के नाम पर पीड़ित से 18,998 रुपए रजिस्ट्रेशन फीस जमा कराई।
इसके बाद अलग-अलग बहाने बनाकर पीड़ित से लगातार रकम जमा कराई गई।
युद्ध का हवाला देकर सोने में निवेश कराया
26 मार्च को पीड़ित की बातचीत करण तनेजा नाम के व्यक्ति से कराई गई। उसने ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच चल रहे युद्ध का हवाला देते हुए सोने के भाव में तेजी आने की बात कही और इसमें निवेश को फायदे का सौदा बताया।
इसके बाद पीड़ित ने 27 मार्च को 25 लाख रुपए निवेश कर दिए। फिर 9 अप्रैल को ऑयल में निवेश के नाम पर 5 लाख रुपए और 16 अप्रैल को 4 लाख रुपए जमा कराए गए।
इस तरह अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराते-कराते पीड़ित ने कुल 45,18,998 रुपए गंवा दिए।
खाते में दिखाया 2.71 लाख डॉलर का मुनाफा
जब पीड़ित ने अपनी रकम वापस मांगी तो आरोपियों ने कहा कि उसका ट्रेडिंग अकाउंट बंद करना होगा। इसके बाद ट्रेडिंग अकाउंट में 2,71,275.68 अमेरिकी डॉलर का लाभ और मूल रकम मिलाकर राशि दिखाई गई।
पीड़ित ने करीब 2.70 लाख अमेरिकी डॉलर निकालने के लिए बैंक खाते की जानकारी दी। आरोपियों ने कहा कि यह क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजेक्शन है, इसलिए रकम आने में दो-तीन दिन लगेंगे।
34 लाख रुपए टैक्स की मांग
20 अप्रैल को जब पीड़ित ने रकम के बारे में जानकारी ली तो आरोपियों ने नया बहाना बनाया। उन्होंने कहा कि रकम निकालने के लिए 15 प्रतिशत टैक्स जमा करना होगा, जिसकी राशि 34 लाख रुपए से अधिक बताई गई।
पीड़ित ने टैक्स की रकम काटकर बाकी पैसा देने की बात कही तो आरोपियों ने मांग घटाकर 12 लाख रुपए कर दी। इसके बाद समीर नाम के व्यक्ति ने भी बातचीत कर टैक्स जमा करना जरूरी बताया।
22 अप्रैल को आरोपियों ने दावा किया कि पीड़ित की रकम तैयार है और टैक्स जमा करते ही भुगतान कर दिया जाएगा। इसके लिए उसे अरुणाचल प्रदेश के एक बैंक खाते में RTGS करने को कहा गया।
यहीं पीड़ित को पूरे मामले पर संदेह हुआ। उसे समझ आया कि ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर उसके साथ साइबर ठगी की जा रही है।
1930 पर शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
पीड़ित ने तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई और बैंक को भी सूचना दी। शिकायत के आधार पर भिलाई नगर थाने में अपराध क्रमांक 217/2026 दर्ज किया गया। पुलिस ने धारा 318(4) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने बैंक खातों में हुए लेन-देन, तकनीकी साक्ष्य और डिजिटल जानकारी खंगाली। इसी दौरान पुलिस को आरोपी विशाल नागले के बारे में अहम सुराग मिले।
इसके बाद पुलिस टीम मध्यप्रदेश के बैतूल पहुंची और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी के पास से मोबाइल और चेकबुक जब्त
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से बैंक की चेकबुक, आधार कार्ड और ठगी में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन जब्त किया है। आरोपी को कोर्ट में पेश कर दिया गया है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी की रकम किन-किन बैंक खातों में पहुंची और इस साइबर ठगी के नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं। पुलिस मास्टरमाइंड और अन्य आरोपियों की तलाश भी कर रही है।
सावधान रहें: सोशल मीडिया पर किसी सेलिब्रिटी, मंत्री या प्रतिष्ठित व्यक्ति के नाम और फोटो देखकर किसी निवेश योजना पर भरोसा न करें। निवेश से पहले संबंधित संस्था और प्लेटफॉर्म की आधिकारिक जानकारी जरूर जांचें।
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