निजी विश्वविद्यालयों में मेडिकल कोर्स पर ब्रेक, मौजूदा कानून में अनुमति नहीं

हेल्थ साइंस यूनिवर्सिटी ने DME को भेजा स्पष्ट अभिमत, अब राज्य सरकार के फैसले पर टिकी नजर

रायपुर। छत्तीसगढ़ में निजी विश्वविद्यालयों में मेडिकल और हेल्थ साइंस से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू करने की कवायद को फिलहाल झटका लगा है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय मेमोरियल हेल्थ साइंस एवं आयुष विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा कानून के तहत निजी विश्वविद्यालयों को मेडिकल एजुकेशन से जुड़े पाठ्यक्रम संचालित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

विश्वविद्यालय ने इस संबंध में अपना अभिमत चिकित्सा शिक्षा संचालनालय (DME) को भेज दिया है। अब इस मामले में राज्य सरकार के अगले कदम पर सबकी नजर है।

किन कोर्सों की मांगी गई थी अनुमति?

निजी विश्वविद्यालयों की ओर से मेडिसिन, सर्जरी, आयुर्वेद, होम्योपैथी, पैरामेडिकल, नर्सिंग और हेल्थ एंड एलाइड साइंस से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू करने की मांग की गई थी। DME ने इस मामले में हेल्थ साइंस यूनिवर्सिटी से कानूनी स्थिति पर स्पष्ट राय मांगी थी।

जवाब में विश्वविद्यालय ने कहा कि वर्तमान अधिनियम में निजी विश्वविद्यालयों को इन पाठ्यक्रमों के संचालन की अनुमति देने का कोई प्रावधान नहीं है।

चार साल से चल रही है कवायद

निजी विश्वविद्यालयों में मेडिकल शिक्षा शुरू कराने की कोशिश नई नहीं है। पिछले करीब चार वर्षों से इस मुद्दे पर लगातार कवायद चल रही है।

2023 में भी तत्कालीन कुलपति और DME की ओर से स्पष्ट किया गया था कि हेल्थ साइंस यूनिवर्सिटी अधिनियम, 2008 में संशोधन के बिना निजी विश्वविद्यालयों को मेडिकल एजुकेशन कोर्स संचालित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

अब एक बार फिर विश्वविद्यालय ने इसी रुख को दोहराया है।

पत्र के बाद फिर चर्चा में आया मामला

जानकारी के मुताबिक, श्री रावतपुरा सरकार लोक कल्याण ट्रस्ट, रायपुर की ओर से बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष को पत्र भेजकर निजी विश्वविद्यालयों को मेडिकल कोर्स संचालित करने की अनुमति देने की मांग की गई थी।

इसके बाद मामला स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य सचिव और फिर चिकित्सा शिक्षा संचालनालय तक पहुंचा। DME ने हेल्थ साइंस यूनिवर्सिटी से इस संबंध में जल्द स्पष्ट अभिमत मांगा था।

BPT काउंसलिंग को लेकर भी नहीं मिली थी अनुमति

इससे पहले एक निजी विश्वविद्यालय ने बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (BPT) की काउंसलिंग खुद कराने की अनुमति मांगी थी। उस समय भी हेल्थ साइंस यूनिवर्सिटी ने NOC देने से इनकार कर दिया था।

विश्वविद्यालय का कहना था कि BPT कोर्स का एफिलिएशन हेल्थ साइंस यूनिवर्सिटी से होगा और काउंसलिंग चिकित्सा शिक्षा विभाग के माध्यम से कराई जाएगी।

रजिस्ट्रार ने क्या कहा?

हेल्थ साइंस यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. दिनेश सिन्हा के मुताबिक, वर्तमान अधिनियम के तहत निजी विश्वविद्यालयों को मेडिकल एजुकेशन के कोर्स संचालित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के प्रबंधन बोर्ड की 20 मार्च 2023 की बैठक में भी इस विषय पर निर्णय लिया गया था।

अब सरकार के फैसले पर नजर

विश्वविद्यालय का अभिमत सामने आने के बाद अब गेंद राज्य सरकार के पाले में है। यदि सरकार निजी विश्वविद्यालयों को मेडिकल और अन्य हेल्थ साइंस पाठ्यक्रम संचालित करने की अनुमति देना चाहती है, तो मौजूदा कानूनी व्यवस्था में बदलाव करना पड़ सकता है।

फिलहाल छत्तीसगढ़ में निजी विश्वविद्यालयों के मेडिकल कोर्स शुरू करने की राह में कानूनी अड़चन बनी हुई है। अब आगे का फैसला राज्य सरकार के रुख पर निर्भर करेगा।

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