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Showing posts from February 20, 2026

तिल्दा-नेवरा गौरवान्वित: विकास सुखवानी बने छत्तीसगढ़ सिंधी सेवा महापंचायत के प्रदेश उपाध्यक्ष।

  तिल्दा-नेवरा- नगर के लिए यह क्षण गर्व और उल्लास से परिपूर्ण है। समाजसेवा, धार्मिक एवं रचनात्मक गतिविधियों में निरंतर सक्रिय रहने वाले नगरपालिका के पूर्व उपाध्यक्ष व पूज्य सिंधी पंचायत के कार्यकारी अध्यक्ष नगर के सुपुत्र विकास सुखवानी को छत्तीसगढ़ सिंधी सेवा महापंचायत का प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनकी यह नियुक्ति महापंचायत के प्रदेश अध्यक्ष अमर गिदवानी की अनुशंसा पर महासचिव जितेंद्र बड़वानी द्वारा की गई है। विकास सुखवानी का व्यक्तित्व सेवा, समर्पण और नेतृत्व क्षमता का सशक्त उदाहरण रहा है। वे वर्षों से सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहे हैं और हर वर्ग के लोगों के बीच अपनी सहजता एवं सक्रियता के कारण लोकप्रिय रहे हैं। नगर में आयोजित धार्मिक आयोजनों, सामाजिक उत्थान कार्यक्रमों और जनकल्याणकारी गतिविधियों में उनकी उपस्थिति सदैव प्रेरणास्रोत रही है। यही कारण है कि जब उनके प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर नियुक्ति का समाचार नगर में पहुँचा, तो तिल्दा-नेवरा ने इसे अपनी सामूहिक उपलब्धि के रूप में स्वीकार किया। नगरवासियों का मानना है कि विकास सुखवानी की यह नियुक्ति न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, ...

ऩंदन स्मेटल्स और प्रशासनिक मौन : ईएस आई ,पीएफ और श्रम कानूनों की वास्तविकता,,,

शैलेश सिंह राजपूत/ ब्यूरो चीफ  तिल्दा-नेवरा ।    तिल्दा-नेवरा में कराहती मानवता: उद्योग की चिमनियों के धुएँ में घुटते श्रमिक अधिकार, तिल्दा-नेवरा की धरती इन दिनों सिर्फ धुआँ ही नहीं उगल रही, वह कराह भी रही है। औद्योगिक चिमनियों से उठता काला गुबार मानो एक सच्चाई को ढकने की नाकाम कोशिश कर रहा है — उस सच्चाई को, जिसमें श्रम का पसीना सूखने से पहले ही इंसानियत की नमी सूखती दिखाई दे रही है। क्षेत्र के ग्राम परसदा में संचालित नंदन स्मेटल्स पर लगे आरोपों ने व्यवस्था की संवेदनहीनता को कठघरे में खड़ा कर दिया है। कहानी किसी एक मजदूर की नहीं, उस वर्ग की है जो भोर से पहले उठता है और रात ढलने के बाद घर लौटता है— इस भरोसे के साथ कि उसकी मेहनत से न सिर्फ उद्योग, बल्कि उसका परिवार भी फले-फूलेगा। परंतु विडंबना देखिए, बारह घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद जब ग्राम  निनवा निवासी मंतूराम साहू जो कि नंदन स्मेटल्स उद्योग में शिफ्ट इंजार्च फीटर के रूप में  कार्यरत था ,जो बारह घंटा के ड्युटी के पश्चात फैक्ट्री गेट से कुछ कदम ही आगे बढ़ा, तो किस्मत ने उसे दुर्घटना के अंधेरे में धकेल दिया। आज ...